मोहनजोदड़ो सभ्यता के बारे में रोचक इतिहास और तथ्य,मोहनजोदड़ो का इतिहास व रहस्य | Mohenjo Daro History in hindi

 


मोहनजोदड़ो को व्यापक रूप से दक्षिण एशिया और सिंधु सभ्यता के सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक शहरों में से एक माना जाता है.

ऐसा माना जाता है कि मोहनजोदड़ो सभ्यता 4500 साल पुरानी है. मोहनजोदड़ो का निर्माण 26वीं शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था. यह प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े शहरों में से एक था.



मोहनजोदड़ो एक सिंधी शब्द है जिसका अर्थ हैमृतकों का टीला. इसेमुआन जो दारोके नाम से भी जाना जाता है. सिंधी भाषा में मुआन का मतलब मृत और दारा का मतलब टीला होता है.

मोहनजोदड़ो दक्षिणी पाकिस्तान के उत्तरी सिंध प्रांत में स्थित सिंधु नदी के दाहिने किनारे पर टीले और खंडहरों का एक समूह है.

मोहनजोदड़ो को विश्व का सर्वाधिक नियोजित नगर माना जाता है, जिसमें वर्तमान नगर निर्माण के ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं, जिनका प्रयोग हम आज भी करते हैं.



खुदाई के दौरान यहां इमारतें, धातु की मूर्तियां और मुहरें मिलीं. ऐसा माना जाता है कि मोहनजोदड़ो शहर 12,00,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ था. 2500 ईसा पूर्व इसकी सीमाएं वर्तमान पाकिस्तान, अफगानिस्तान और भारत तक फैली हुई थीं.

मोहनजोदड़ो दुनिया की चार प्राचीन नदय-घाटी सभ्यताओं में सबसे विशाल है.

4500 साल पुरानी इस सभ्यता की आबादी शायद 40000 से ज्यादा थी.

मोहनजोदड़ो सभ्यता के लोगों को तांबे का ज्ञान तो था पर लोहे का कोई ज्ञान नहीं था.

मोहनजोदड़ो में 8 फीट गहरा, 23 फीट चौड़ा और 30 फीट लंबा एक जलरोधक कुंड भी मिला है. इसमें जलरोधक ईंटें भी लगी हैं, ऐसा माना जाता है कि इसका उपयोग सामूहिक स्नान के लिए किया जाता था.

इस शहर के लोगो को तांबे का ज्ञान था लेकिन लोहे के बारे में कोई ज्ञान नही था.

मोहनजोदड़ो सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे पुराना शहर था।